वो कहता है तू खुदा है मेरा

तू ही इश्क़ है तू है सबकुछ मेरा

 

तुझे देखूँ तो साँसे चलती है मेरी

तू देखे तो धड़कन बढ़ती है मेरी

 

तेरी पलकों के उठने का इंतज़ार रहता है

तेरी आँखों में दिल मेरा डूबा रहता है

 

तेरी ज़ुल्फ़ों से घना कुछ और नहीं

बस तू दिख जाए फिर कुछ और दिखता नहीं

 

वो कहता है तुझमें एक ख़ुश्बू है

तेरे साथ होने से मेरी ज़िंदगी महकती है

 

तुझे छूने का एक अलग एहसास है

बस याद कर लो तो लगता है हम पास है

 

तू साथ होती है तो दिल को सुकून मिलता है

बेरंग सी ज़िंदगी में भी रंग दिखता है

.

.

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आज जब तुम पास नहीं हो

याद आती है तुम्हारी कही हर बात

तुम क्या कहते थे, कैसे तुम्हारी बातों में

गुजर जाती थी मेरी सुबह मेरी रात

 

अब कुछ कहने की ज़रूरत नहीं

सुन ली मैंने सारी बातें अनकही

हर उस बात पे मुझे प्यार है तुमसे

क़सम है, मेरी हर साँस है तुमसे

 

 

This poem is one of the eight poems on the theme “विरह” written to take my blog to the next level with Blogchatter‘s #MyFriendAlexa 2020

Read the previous poems on the theme here-

Theme Reveal

कहने को तुम दूर हो 

सोचती हूँ

 

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royrashi
royrashi@gmail.com

34 thoughts on “वो कहता है”

  1. Wah kya baat hai.excellent.👌👌👌👌👏👏👏👏👏👍🤩🤩🤩🤩😍😍😍😍keep it up dear.🤗🤗🤗

  2. आँखों में डूबना
    पलकों में उठना
    तेरी खुशबू की महक
    तेरे साथ से सुकून
    इतनी हो मोहब्बत
    तो किसी और की क्या ज़रूरत

    बहुत खूबसूरत विरह की ये कहानी
    जिसे वो कहता है तुम सुनती हो

  3. Rashi, first of all you look ultra beautiful in the picture. The poem is amazing and every word is heartfelt. I loved especially the last para where she differentiates about past & present . beautifully penned. looking forward to reading more.

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