माँ के लिए क्या लिखू माँ ने ख़ुद मुझे लिखा है,
भगवान कंहा है पता नहीं पर माँ में मुझे वो दिखा है
माँ बनना कितना मुश्किल है ये माँ बनकर पता चला,
माँ के हर मुसकान का राज मुझे आज पता चला
माँ मेरी माँ दुर्गा जैसी सर्व शक्ति सवरूपिनी,
माँ से ना हो पाये दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं
माँ के हाथ के पराँठे के आगे छप्पन भोग भी फीका है,
हर परिस्थिति का सामना करना माँ से ही सिखा है
बिना कहे ही समझ जाति है दिल की हर बात,
तबियत ख़राब हो जाय तो जाग जाति है पुरी रात
पढ़ाई की हर कठिनाई को माँ ने ही किया आसान,
बड़े प्यार से पुरा किया मेरे दिल के हर अरमान
सदा यूँही ख़ुश रहे ग़म का ना हे कोई नाम,
हसते और खिलखिलाते हुऐ बीते हर शाम
ये बात ज़ुबान पे कभी आयी नहीं की मुझको कितना प्यार है माँ से,
सच तो ये हे की मेरी हर साँस हे माँ से
ऐसी माँ की बेटी बनकर धन्य हुआ मेरा जीवन,
माँ की हर ख़ुशी के लिए कर दूँ मैं अपना सबकुछ समरपन

Watch me recite my poem “Maa” on YouTube. (click the link)

I had written this poem around three years ago and today I felt like reciting it and share it with my YouTube audience. I dedicated this poem to my mother, she was the happiest then and she is again the happiest now after watching my video.

Below is the WOW prompt that required us to recycle an old blogpost. I recycled it by adding a video to my blogpost. Hope you all like it. Stay tuned for many more such videos in my YouTube channel and definitely SUBSCRIBE and help my channel grow.

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royrashi
royrashi@gmail.com

6 thoughts on “Maa”

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